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पद्मविभूषण गिरिजा देवी जी की स्मृति में 'पुष्पांजलि' - 2023-24


दिनांक  - 12 दिसंबर 2023
स्थान- असि घाट वाराणसी

उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी लखनऊ, एवं संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश द्वारा सुबह-ए-बनारस, वाराणसी के सहयोग से दिनांक 12 दिसंबर 2023 को पद्मविभूषण विदुषी गिरिजा देवी जी की स्मृति में असि घाट वाराणसी पर ‘‘पुष्पांजलि’’ संगीत समारोह का आयोजन सफलतापूर्वक किया गया। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में पद्मश्री विदुषी गिरिजा देवी जी की प्रमुख शिष्या पद्मश्री मालिनी अवस्थी तथा अन्य अतिथिगण पद्मभूषण डॉ0 एन राजम, अकादमी के पूर्व अध्यक्ष पद्मश्री डॉ राजेश्वर आचार्य, पूर्व कुलपति किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय पद्मश्री डॉ सरोज चूड़ामणि गोपाल, सुप्रसिद्ध कथक कलाकार पद्मश्री नलिनी एवं पद्मश्री कमलिनी जी तथा लंदन से पधारी आर्डर ऑफ ब्रिटिश एम्पायर से विभूषित भरतनाट्यम कलाकार डॉ0 गीता उपाध्याय, अकादमी पुरस्कार से अलंकृत डॉ विजय कपूर उ0प्र0 के पूर्व संस्कृति पर्यटन धर्मार्थ एवं प्रोटोकॉल मंत्री डॉ0 नीलकंठ तिवारी, डॉ रत्नेश वर्मा, पं0 प्रमोद मिश्र एवं डॉ0 वीरेंद्र प्रताप सिंह आदि उपस्थित रहे। अकादमी निदेशक डॉ0 शोभित कुमार नाहर द्वारा सभी अतिथियों का स्वागत करने के उपरान्त दीप प्रज्ज्वलन कर सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरूआत की।

इस अवसर पर डॉ नीलकंठ तिवारी ने विदुषी गिरिजा देवी जी के व्यक्तित्व को विशेषता, सहजता एवं शुद्धता से परिपूर्ण बताते हुए उनके जीवन को प्रेरक बताया। गिरिजा देवी जी की प्रिय शिष्या पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने अपनी गुरू का स्मरण करते हुए उनकी सांगीतिक वैविध्य का भी स्मरण किया और अपनी गुरू की स्मृति में आयोजन साकार करने के लिये संस्कृति मंत्री श्री जयवीर सिंह जी के मार्गदर्शन एवं प्रमुख सचिव, संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश सरकार के संरक्षण सहयोग के प्रति विशेष साधुवाद व्यक्त किया।

सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरूआत विश्वप्रसिद्ध वायलिन वादिका पद्मभूषण विदुषी डॉ0 एन.राजम तथा उनकी सुपुत्री एवं सुयोग्य शिष्या डॉ0 संगीता शंकर जी द्वारा युगल वायलिन वादन की संगति एवं बनारस घराने के लोकप्रिय वादक श्री अभिषेक मिश्र की तबला संगति के माध्यम से गायकी अंग में प्रस्तुत राग गोरख कल्याण में विलंवित एकताल में निबद्ध रचना से हुई। इसी क्रम में द्वितीय प्रस्तुति बनारस घराने के सुप्रसिद्ध गायक कलाकार पद्मभूषण पं साजन मिश्र एवं उनके सुपुत्र तथा सुयोग्य शिष्य श्री स्वरांश मिश्र जी ने युगल गायन राग मारु बिहाग में विलंबित एकताल में निबद्ध बन्दिश से बोल ‘‘सईया तोरे’’ द्वारा की। इसी क्रम में अगली रचना तीनताल में निबद्ध रसपूर्ण रही जिसके बोल थे ‘‘सघन वन बोले रे कोयलिया’’ थी। इनके साथ तबले पर श्री राजेश मिश्रा एवं संवादिनी पर साथ दिया पं धर्मनाथ मिश्र ने।

सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरूआत वाराणसी से आए प्रियांशु घोष ने अपनी प्रस्तुति राग शिवरंजनी, विलम्बित एक ताल में सुनाया ’ ऐरी कांहे कूकूत बैरन.... इसके बाद द्रुत तीनताल में ’ कोयल बोले कू कू कू....। इसके अलावा उन्हें राग खमाज में टप्पा अद्धा त्रिताल मे ए मियां मैं ताने वारि जाऊं ’ सुनाया। तत्पश्चात नई दिल्ली से आए रीतेश -रजनीश मिश्रा ने अपनी पुष्पांजलि राग मधुकौंस में प्रस्तुत की। इसके अलावा उन्होंने भजन ’जननी मैं न जियूं बिन राम...गाया अन्त में मुंबई से आईं सुश्री अश्विनी भिड़े ने आजकल चल रहे चैत्र के महीने को देखते हुए चैती सुनाकर अप्पा जी को अपनी श्रद्धाजंलि अर्पित की।


दिनांक  - 09 फरवरी, 2024
स्थान- सेठ गंगा प्रसाद माहेश्वरी सभागार, सहारनपुर

उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी लखनऊ, (संस्कृति विभाग, उ.प्र.) द्वारा ज़िला प्रशासन, सहारनपुर के सहयोग से दिनांक 09 फरवरी, 2024 को पद्मविभूषण विदुषी गिरिजा देवी जी की स्मृति में गांधी पार्क स्थित सेठ गंगा प्रसाद माहेश्वरी सभागार में ‘‘पुष्पांजलि’’ संगीत समारोह का आयोजन सफलतापूर्वक किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि महापौर नगर निगम, सहारनपुर, डॉ. अजय सिंह, विशिष्ट अतिथि डॉ. दिनेश चन्द्र, ज़िलाधिकारी सहारनपुर, एडीएम-ई डॉ.अर्चना द्विवेदी तथा एडीएम वित्त एवं राजस्व श्री रजनीश मिश्र आदि उपस्थित रहे। अकादमी निदेशक डॉ. शोभित कुमार नाहर द्वारा सभी अतिथियों का स्वागत करने के उपरान्त अतिथियों सहित दीप प्रज्ज्वलन कर सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत की।

इस अवसर पर अकादमी निर्देशक डॉ. शोभित कुमार नाहर द्वारा अवगत कराया गया कि अकादमी की ओर से यह कार्यक्रम पूरे प्रदेश में अलग-अलग स्थान पर आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय संस्कृति को युवा पीढ़ी तक पहुंचाना और क्षेत्रीय विधाओं का प्रचार-प्रसार करना है।

सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरूआत सुश्री पद्मजा चक्रवर्ती, दिल्ली और उस्ताद सखावत हुसैन रामपुरी ने अपने स्वरों को संगीतमयी धागे में पिरोकर सांस्कृतिक प्रस्तुति की माला बनाकर प्रस्तुत की। इनके साथ संगतकर्ता के तौर पर भारतीय वाद्ययंत्रों की धरोहर को संजोते हुए हारमोनियम पर श्री सुमित मिश्र, तबले पर श्री सिद्धार्थ चक्रवर्ती एवं लवी शर्मा, तानपुरा पर सुश्री सोनाली राय चौधरी और आकांक्षा सिंह, सारंगी पर सुश्री प्रिया रस्तोगी तथा सिंथसाइज़र पर श्री शावेज उपस्थित रहे।


दिनांक  - 16 फरवरी, 2024
स्थान- सूर सदन, महात्मा गांधी मार्ग, आगरा

उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी लखनऊ, (संस्कृति विभाग, उ0प्र0) द्वारा ज़िला प्रशासन, आगरा के सहयोग से दिनांक 16 फरवरी, 2024 को पद्मविभूषण विदुषी गिरिजा देवी जी की स्मृति में सूर सदन, महात्मा गांधी मार्ग, आगरा में ‘‘पुष्पांजलि’’ संगीत समारोह का तीसरा आयोजन सफलतापूर्वक किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि मा0 मंत्री श्रीमती बेबी रानी मौर्य तथा संस्कार भारती से श्री राज बहादुर सिंह व अन्य अतिथिगण आदि उपस्थित रहीं। अकादमी निदेशक डॉ0 शोभित कुमार नाहर द्वारा सभी अतिथियों का स्वागत करने के उपरान्त अतिथियों सहित दीप प्रज्ज्वलन के उपरान्त सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरूआत हुई।

सर्वप्रथम कोलकाता से आई सुश्री मनाली बोस ने राग बसन्त में ख़्याल गायन की प्रस्तुति दी तत्पश्चात् संगीत की शास्त्रीयता से भरी ठुमरी ‘तुम तो करत बर जोरी’ गाकर विदुषी गिरिजा देवी जी को स्वरांजलि दी। उनके साथ हारमोनियम पर श्री धर्मनाथ मिश्रा एवं तबले पर श्री इमोन सरकार ने संगत की।

दूसरी प्रस्तुति में चंडीगढ़ से पधारे कश्यप बंधुओं ने अपने सुरीले सुर, लय और ताल से संगीत की सुर लहरियों को प्रवाहित करते हुए झपताल में निबद्ध विलंबित ख़्याल रचना ‘बलमा न माने’ प्रस्तुत की। इसके बाद ‘ऋतु बसंत सखि’ गाते हुए सभी को संगीत की ऊर्जा से सराबोर कर बसंती रंग में रंग दिया। इस दौरान हारमोनियम पर श्री सुमित मिश्रा, तानपुरे पर श्री भारत बिदुआ, श्री शुभम ठाकुर व श्री जगजीत शाह एवं तबले पर श्री आनन्द मिश्रा ने संगत की।


दिनांक  - 20 फरवरी, 2024
स्थान- संत गाडगे जी महाराज प्रेक्षागृह, लखनऊ

उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी लखनऊ, (संस्कृति विभाग, उ0प्र0) द्वारा दिनांक 20 फरवरी, 2024 को पद्मविभूषण विदुषी गिरिजा देवी जी की स्मृति में संत गाडगे जी महाराज प्रेक्षागृह में ‘‘पुष्पांजलि’’ समारोह का आयोजन सफलतापूर्वक किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि मा0 संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री जयवीर सिंह, विशिष्ट अतिथि के तौर पर प्रमुख सचिव श्री मुकेश कुमार मेश्राम, समाज कल्याण के प्रमुख सचिव डाॅ0 हरिओम, भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय की कुलपति डाॅ0 माण्डवी सिंह आदि उपस्थित रहे। अकादमी निदेशक डॉ0 शोभित कुमार नाहर द्वारा सभी अतिथियों का स्वागत करने के उपरान्त अतिथियों सहित दीप प्रज्ज्वलन कर सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत की।

इस अवसर पर संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री जयवीर सिंह जी ने कहा कि संगीत के बिना जीवन अधूरा माना जाता है। इसलिए उत्तर प्रदेश का संस्कृति विभाग राज्य के हर ज़िले में महोत्सव कर कलाकारों को प्रोत्साहित कर रहा है, जिसमें ग्रामीण से युवा संगीतकारों तक को साल में तीन प्रस्तुतियां देने का अवसर प्रदान किया जा रहा है। इसके अलावा अन्य संस्थाओं से सम्बद्ध होकर एमओयू के जरिए संस्कृति का आदान-प्रदान किया जा रहा है।

कार्यक्रम की शुरूआत करते हुए वरिष्ठ तबला वादक पंडित कुमार बोस ने तीन ताल मध्य लय वादन से श्रोताओं को आनन्दित किया। तत्पश्चात पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने प्रो0 कमला श्रीवास्तव एवं पद्मश्री राजबिसारिया जी को श्रृद्धांजलि देने के उपरान्त अपनी गुरू विदुषी गिरिजा देवी को नमन करते हुए उनकी सिखायी प्रिय ठुमरी राग खम्बावती में निबद्ध ‘होली खेलो मोसे नंद लाल’ सुनायी, इसके बाद दादरा ‘बहिया छोड़ो न बलम’ और अन्त में चैती ‘बैरन रे कोयलिया ताहरी बोली न सुहाए’ सुनाया। आपके साथ संगतकर्ता के रूप में हारमोनियम पर पंडित धर्मनाथ मिश्रा, तबले पर कुमार बोस और तानपुरे पर मानसी एवं आकृति ने संगत की।

कार्यक्रम के अन्त में पद्मविभूषण पंडित हरिप्रसाद चौरसिया जी ने राग मारू बिहाग से बांसुरी वादन की शुरुआत की, तत्पश्चात बांग्ला गीत ‘ओम जय जगदीश हरे,’ की आरती धुन बजाकर उपस्थित जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया। आपके साथ तबले पर प्रसिद्ध तबला वादक पं0 छन्नूलाल मिश्रा के पुत्र पं0 रामकुमार मिश्रा एवं सह बांसुरी वादक देबोप्रिया, रानादीव एवं जय गांधी ने संगत की।


दिनांक  - 08 मई, 2024
स्थान- रामघाट आरती स्थल, चित्रकूट

उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी लखनऊ, संस्कृति विभाग, उ0प्र0 जगद्गुरू रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय एवं ज़िला प्रशासन, चित्रकूट के सहयोग से पद्मविभूषण विदुषी गिरिजा देवी जी की स्मृति में 95वें जन्म दिवस के अवसर पर दिनांक 08 मई, 2024 को रामघाट आरती स्थल पर ‘‘पुष्पांजलि’’ संगीत समारोह का आयोजन सफलतापूर्वक किया गया। विदुषी गिरिजा देवी जी ने अपने जीवन में उत्तर भारतीय संगीत में ठुमरी, दादरा, चैती, शास्त्रीय उपशास्त्रीय गायन के साथ ही ख्याल एवं शास्त्रीय गायन को भी एक अद्भुत आयाम प्रदान किया है। आपने अनेक कलाकारों को शिक्षा प्रदान कर उन्हें ख्याति अर्जित करने में अपना आशीर्वाद प्रदान किया।

इस अवसर पर अपर पुलिस अधीक्षक श्री चक्रपाणि त्रिपाठी, क्षेत्रीय पर्यटक अधिकारी श्री अनुपम श्रीवास्तव, कामदगिरी प्रमुख द्वार के महंत श्री मदन गोपालदास जी महाराज, जगद्गुरू रामभद्राचार्य, दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय के डॉ0 विनोद कुमार मिश्र, राजनीतिशास्त्र के विभागाध्यक्ष श्री सुशील त्रिपाठी, संगीत विभागाध्यक्ष डॉ0 ज्योति, शिक्षा संकाय के प्रभारी डॉ0 निहार रंजन मिश्र, बी.एड. विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ0 रजनीश मिश्र, तथा महात्मा गांधी ग्रामोदय विश्वविद्यालय, चित्रकूट के संगीत विभागाध्यक्ष डॉ0 विवेक फणनीस उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का उद्घाटन पद्मविभूषण जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी ने किया, इस अवसर पर उन्होंने अपने विद्यार्थी जीवन में विदुषी गिरिजा देवी जी के साथ के संस्मरण को साझा करते हुए कहा कि गिरिजा देवी जी को प्रेम से सभी लोग अप्पाजी ही कहते थे और चित्रकूट में उनकी स्मृति में आयोजित ‘पुष्पांजलि’ में श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए एक चैती और एक भजन प्रस्तुत कर उन्होंने अप्पा जी को अपनी स्वरांजलि प्रस्तुत की। तत्पश्चात् बनारस से पधारे सुप्रसिद्ध शास्त्रीय एवं उप शास्त्रीय गायक श्री गणेश प्रसाद मिश्र ने विदुषी गिरिजा देवी जी की स्मृति में उनकी अत्यंत प्रिय रचनाओं को ठुमरी एवं दादरा में प्रस्तुत कर गिरिजा देवी जी को अपनी स्वरांजली के माध्यम से पुष्पांजलि अर्पित की। अपनी प्रस्तुति में श्री गणेश प्रसाद मिश्र जी ने दादरा ताल में ‘‘सांवरिया प्यारा रे मोरी गुईयां’’ तथा ‘‘श्याम कैसा जादू डाला रे’’ की प्रस्तुति में गिरिजा देवी जी की गायकी के पुट को समाहित करते हुए प्रस्तुत करने का अद्भुत प्रयास किया। इसके उपरान्त नित्य मंदाकिनी की आरती आरंभ हुई जिसमें पद्म विभूषण पंडित विश्व मोहन भट्ट, श्री गणेश प्रसाद मिश्रा, अन्य अतिथिगण एवं अकादमी के निदेशक डॉ0 शोभित कुमार नाहर ने आरती में सहभागिता करते हुए मां मंदाकिनी की आरती की। आरती के पश्चात् विश्व प्रसिद्ध मोहन वीणा के आविष्कारक एवं पूरी दुनिया में मोहन वीणा को ख्याति दिलाने वाले पद्मभूषण से सम्मानित पं0 विश्व मोहन भट्ट ने अपनी प्रस्तुतियां ‘राग गावती’, ‘राम भजन’, राजस्थानी धुन ‘केसरिया बालम पधारो मारे देश’ तथा वंदे मातरम’ से विदुषी गिरिजा देवी जी को अपनी पुष्पांजलि अर्पित की। बुंदेलखंड प्रदेश के ग्रामीण अंचलों और चित्रकूट के आमजन तथा पधारे हुए भक्तों ने इस सांस्कृतिक कार्यक्रम का भरपूर आनंद लिया।

कार्यक्रम के उद्घोषक डॉ0 गोपाल कुमार मिश्रा ने कहा कि प्रत्येक अमावस्या पर इस तरह के कुछ आयोजन यदि संस्कृति विभाग की ओर से होते रहे तो चित्रकूट का यह घाट सांस्कृतिक मूल्यों की स्थापना का एक सशक्त माध्यम बन जाएगा।

अन्त में अकादमी निदेशक डॉ0 शोभित कुमार नाहर ने सभी का आभार व्यक्त किया और भविष्य में चित्रकूट के रामघाट पर ऐसे अनेक शास्त्रीय संगीत के कार्यक्रमों को आयोजित करने के लिए आश्वासन भी प्रदान किया।