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प्रदेश में संगीत, नृत्य, नाटक, लोक विधाओं सम्बन्धी परम्पराओं के विषय में अधिक जागरूकता एवं जानकारी, नवोदित प्रतिभाशाली युवा कलाकारों को प्रोत्साहन, नवीन प्रतिभाओं का विकास

योगी आदित्यनाथ

माननीय मुख्यमंत्री,
उत्तर प्रदेश

श्री जयवीर सिंह

माननीय मंत्री,
उत्तर प्रदेश

पदमश्री डॉ. राजेश्वर आचार्य

अध्यक्ष,
उ.प्र.संगीत नाटक अकादमी

योगी आदित्यनाथ

माननीय मुख्यमंत्री,
उत्तर प्रदेश

श्री जयवीर सिंह

माननीय मंत्री,
उत्तर प्रदेश

पदमश्री डॉ. राजेश्वर आचार्य

अध्यक्ष,
उ.प्र.संगीत नाटक अकादमी

श्री तरुण राज

सचिव,
उ.प्र.संगीत नाटक अकादमी

योगी आदित्यनाथ

माननीय मुख्यमंत्री,
उत्तर प्रदेश

श्री जयवीर सिंह

माननीय मंत्री,
उत्तर प्रदेश

पदमश्री डॉ. राजेश्वर आचार्य

अध्यक्ष,
उ.प्र.संगीत नाटक अकादमी

कला की विविध परंपराओं की दृष्टि से उत्तर प्रदेश अत्यन्त समृद्ध है। राज्य में संगीत, नृत्य एवं नाट्य कला को समन्वित करने और उसका विकास करने के लिए 13 नवम्बर 1963 को उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी की स्थापना की गई थी, जो आधी शती से अधिक अपनी लंबी यात्रा में संगीत, नृत्य, नाटक, लोकसंगीत एवं लोकनाट्य की परम्पराओं के प्रचार-प्रसार संवर्धन एवं परिरक्षण का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। अकादमी ने जहां कलाओं और कलाकारों के प्रोत्साहन एवं संरक्षण का दायित्व निभाया है, उनका अभिलेखीकरण किया है, वहीं नई प्रतिभाओं को पहचान कर उन्हें कलाप्रेमियों के सामने लाने का कार्य भी किया गया है, जो कलाओं की परंपरा को बचाए रखने के लिए आवश्यक है। अपनी स्थापना के समय से ही अकादमी का प्रयास रहा है कि उसकी योजनाओं से न सिर्फ कला परंपराओं का संरक्षण होता रहे बल्कि उनके कलाकारों को भविष्य की चुनौतियों से टकराने का साहस और आत्मविश्वास भी मिलता रहे।

प्रदेश की प्रदर्शनकारी कलाओं के उन्नयन, प्रचार एवं परिरक्षण हेतु प्रदेश सरकार ने जब इसकी स्थापना की थी तब इसे उत्तर प्रदेश नाट्य भारती का नाम दिया गया था, जिसे 02 सितम्बर 1969 में उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी का वर्तमान नाम मिला। अकादमी ने यह दायित्व हमेशा से निभाया है कि सीमित संसाधनों के बावजूद प्रदेश की पारम्परिक प्रदर्शनकारी कलाओं के संवर्धन, परिवर्धन एवं परिरक्षण के क्षेत्र में सतत कार्य लगातार चलता रहे। अकादमी ने प्रदेश की विलुप्त होती कलाओं को बढ़ावा देते हुए दूरदराज़ के क्षेत्रों से उन कलाकारों को, जो समय तथा परिस्थिति के साथ अपनी सांस्कृतिक धरोहर से दूर हो गए है, खोजकर लाने तथा उन्हे मंच प्रदान करने का लगातार प्रयास भी किया है। अकादमी का मुख्य उद्देश्य प्रदेश की संगीत, नृत्य एवं नाटक की परम्पराओं को प्रोत्साहन देना, प्रचार प्रसार करना है । अपने 57 वर्षों में अकादमी की कोशिश रही है कि अपने मूल उद्देश्यों की पूर्ति की दिशा में हमेशा क्रियाशील रहे। इसके लिए तरह-तरह की योजनाएं, कार्यक्रम, गतिविधियां को नियमित रूप से सम्पन्न कराया जाता है। अवध संध्या, सम्भागीय नाट्य समारोह, शास्त्रीय संगीत प्रतियोगिता, नाट्य प्रशिक्षण कार्यशालाएं, रसमंच, अकादमी स्थापना दिवस 'धरोहर', ग़ज़ल साम्राज्ञी बेगम अख्तर की स्मृति में 'यादें' इनमें प्रमुख हैं।

कार्य कलाप

अकादमी सम्मान

अवध संध्या

नमन

धरोहर

यादें

नाट्य समारोह


कार्यशालाएं

रसमंच

शास्त्रीय संगीत प्रतियोगितायें

ध्रुवपद समारोह

क्षितिज श्रृंखला

अन्य कार्यक्रम