अवध संध्या 2022-23

उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी की मासिक श्रृंखला के अन्तर्गत दिनांक 28 अप्रैल, 2022 को उ0प्र0 संगीत नाटक अकादमी, (संस्कृति विभाग उ.प्र.) और बाबा भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में सूर्या थिएटर कल्चरल आर्ट्स सोसाइटी, लखनऊ की हास्य नाट्य प्रस्तुति ‘पति चाहिये’ का प्रभावी मंचन बाबा भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के सभागार में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रो राणा प्रताप सिंह, डीन (एकेडमिक अफेयर्स), बीबीएयू, प्रो के.एल. महावर, समन्वयक बीबीएयू एवं अकादमी सचिव श्री तरुण राज ने दीप प्रज्वलित कर किया।

राजेंद्र तिवारी के लेखन, विवेक मिश्र विष्णु के निर्देशन व रमा जायसवाल के सह निर्देशन में हुए नाटक में कलाकारों ने सामाजिक संदेश देने के साथ दर्शकों का खूब मनोरंजन भी किया।

उ0प्र0 संगीत नाटक अकादमी, लखनऊ (संस्कृति विभाग, उ0प्र0) एवं दीप सामाजिक संस्थान द्वारा अवध संध्या श्रृंखला के अन्तर्गत ‘लोकरंग’ कार्यक्रम का आयोजन दिनांक 22 जुलाई, 2022 को डॉ0 सम्पूर्णानन्द प्रेक्षागृह (टाउन हॉल गांधी पार्क, गोण्डा) में किया गया।

कार्यक्रम का शुभारम्भ भाजपा अवध प्रांत के अध्यक्ष शेष नारायण मिश्र, जिलाध्यक्ष अमर किशोर कश्यप, अकादमी सचिव तरूण राज ने दीप प्रज्जवलित कर किया।

कार्यक्रम का आरम्भ आकाशवाणी व दूरदर्शन गायिका प्रीति सिंह, (लखनऊ) ने वंदेमातरम गीत के साथ लोक परम्पराओं के कजरी गीत, देवी गीत सुनाकर कार्यक्रम में शामिल लोगों को उत्साहित किया वहीं आल्हा गायक सहीराम पाण्डे, एवं उनके साथियों (गोण्डा) ने वीर रस का गायन प्रस्तुत किया। गुलाब सिंह व उनके साथियों ने ‘जन्में अवध में राम, गाओ रे मंगल गीत सखी रे, सीता स्वयंवर वर्णन की सफल प्रस्तुति दी।

कार्यक्रम के अंत में मंच के सभी कलाकारों को अपर जिलाधिकारी सुरेश कुमार सोनी ने प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया।

उ0प्र0संगीत नाटक अकादमी द्वारा दिनांक 07 अक्टूबर, 2022 को पद्मविभूषण पं0 किशन महाराज जन्म शती वर्ष के अन्तर्गत उ0प्र0संगीत नाटक अकादमी (संस्कृति विभाग, उ0प्र0) एवं अन्तर्राष्ट्रीय बौद्ध संस्थान, लखनऊ बौद्ध संस्थान, लखनऊ तथा उ0प्र0जैन विद्या शोध संस्थान, लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित नादांजलि- ‘लय-किसलय’ एवं चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन, किया गया। दीप प्रज्जवलन के उपरान्त अकादमी के सचिव तरुण राज ने कहा कि पंडित किशन महाराज के जन्मशताब्दी वर्ष में अकादमी की त्रैमासिक पत्रिका ‘छायानट’ विशेषांक का प्रकाशन उन पर आधारित किया जाएगा। इस मौके पर ‘छायानट’ के संपादक आलोक पराड़कर ने पंडित किशन महाराज से जुड़े विभिन्न प्रसंगों की चर्चा करते हुए कहा कि उन्होंने संगतकार को मुख्य कलाकार के बराबर का सम्मान दिलाया। उत्तर प्रदेश जैन विद्या शोध संस्थान के उपाध्यक्ष अभय कुमार जैन ने भी पंडित किशन महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित की।

सांस्कृतिक कार्यक्रम का आरम्भ पूरण महाराज और अवंतिका मिश्रा, वाराणसी ने तबले पर बनारस घराने के अनुरूप तीन ताल में युगल तबला वादन प्रस्तुत किया। पंडित किशन महाराज जी की परंपरा के अनुरूप ता की तिहाई से शुरू करके उठान के पश्चात छोटे आमद और फिर चलनचारी की प्रस्तुति की। अन्त में अवंतिका मिश्रा ने अपने परदादा पंडित कठे महाराज जी की रचना स्तुति परन- ओम धा निर्मल धा.. बजाकर किया।

तत्पश्चात् विदुषी मीना मिश्रा, वाराणसी ने प्राचीन बंदिशों के साथ अपने गायन का कार्यक्रम प्रस्तुत किया। मीना मिश्रा गायन के साथ बंदिश रचना एवं काव्य लेखन से भी जुड़ी हैं तथा उपशास्त्रीय गायकी की शिक्षा भी देती है। उन्होंने सर्वप्रथम राग खमाज में पूरब अंग की ठुमरी ‘अब ना बजाओ श्याम’... प्रस्तुत किया।इसके पश्चात राग खमाज में ही बोल बांट की ठुमरी ‘हटो जाओ रे ना बोलो कान्हा’ सुनाया। इसी क्रम में उन्होंने राग मिश्र पीलू में एक पुरानी बंदिश ‘हमें ना भावे यारी रे सांवरिया’ सुनाते हुए कहा कि यह बंदिश पंडित किशन महाराज जी को बहुत पसंद थी।

चित्रकला प्रतियोगिता का हुआ आयोजन
पंडित किशन महाराज बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। विख्यात तबला वादक होने के साथ ही वे चित्रकार एवं मूर्तिकार भी थे। समारोह में अन्तर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान एवं उत्तर प्रदेश जैन विद्या शोध संस्थान के तत्वावधान में चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें बड़ी संख्या में छात्र छात्राओं ने भाग लिया और पंडित किशन महाराज पर चित्र बनाए।