नाट्य समारोह 2025-26

उ0प्र0संगीत नाटक अकादमी, लखनऊ द्वारा प्रतिवर्ष चार दिवसीय सम्भागीय नाट्य समारोह का आयोजन प्रदेश के किसी जनपद में नाट्य विधाओं के संवर्द्धन, परिरक्षण तथा प्रदेश के रंगकर्म को गति प्रदान करने के उद्देश्य से किया जाता है। इसी कड़ी के अन्तर्गत वर्ष 2025-26 में सम्भागीय नाट्य समारोह का प्रथम आयोजन एन.टी.पी.सी. सिंगरौली, सोनभद्र, द्वितीय आयोजन संतकबीर अकादमी, मगहर में तथा तृतीय आयोजन छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के सहयोग से किया गया। अकादमी द्वारा आयोजित किए गए नाटकों का विवरण निम्नवत हैः-

उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी, लखनऊ (संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश) एवं एन.टी.पी.सी. सिंगरौली, सोनभद्र (उ.प्र.) के सहयोग से दिनांक 02 से 05 फरवरी, 2026 तक सम्भागीय नाट्य समारोह 2025-26 का आयोजन कर्मचारी विकास केन्द्र, एन.टी.पी.सी. सिंगरौली में किया गया। जिसमें दिनांक 02 फरवरी, 2026 को मंथन आर्ट्स सोसाइटी, शाहजहांपुर द्वारा लोककथा पर आधारित नाटक ‘‘नागिन तेरा वंश बढ़े’’ का मंचन किया। नाटक विजय दान देथा की कहानी पर आधारित है जिसके लेखक विजयदान देथा रूपान्तरण श्री वी.के. तथा निर्देशन शिवा सक्सेना द्वारा किया गया।

द्वितीय दिवस दिनांक 03 फरवरी, 2026 को सम्भागीय नाट्य समारोह 2025-26 के अन्तर्गत सायं 07ः00 बजे से कर्मचारी विकास केन्द्र, एन.टी.पी.सी. (सिंगरौली), सोनभद्र में समर्पित साहित्यिक सांस्कृतिक एवं सामाजिक संस्था, प्रयागराज द्वारा नाटक ‘‘आदाब अर्ज़ है’’ का मंचन किया गया जिसके लेखक मौलियार रूपान्तरण सलीम आरिफ़ ने किया तथा निर्देशन संजू साहू द्वारा किया गया।

तृतीय दिवस दिनांक 04 फरवरी, 2026 को कर्मचारी विकास केंद्र, एन.टी.पी.सी सिंगरौली, सोनभद्र (उ.प्र.) में अनुभूति नाट्य इकाई, कानपुर की संस्था द्वारा नाटक ‘‘दिल की दुकान’’ का मंचन किया गया। नाटक के लेखक राजेन्द्र शर्मा तथा निर्देशन रतन सिंह राठौर द्वारा किया गया।

इसी क्रम में दनांक 05 फरवरी, 2026 को चौथे एवं समापन दिवस पर संस्था रसरंग, कानपुर द्वारा नाटक ‘‘चंदा बेड़नी’’ का मंचन किया गया। नाटक के लेखक अलखनन्दन रूपान्तरण किया है विजय बहादुर श्रीवास्तव ने तथा निर्देशन नीरज कुशवाहा द्वारा किया गया।

उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी (संस्कृति विभाग, उ0प्र0) द्वारा संत कबीर अकादमी, मगहर के सहयोग से दिनांक 09 से 12 फरवरी, 2026 तक द्वितीय सम्भागीय नाट्य समारोह का आयोजन संत कबीर अकादमी, मगहर में किया गया। दीप प्रज्जवलन के उपरान्त प्रथम दिवस दिनांक 09 फरवरी, 2026 को दीप प्रज्वलन के उपरांत समारोह के प्रथम दिवस संभव कला मंच गोरखपुर की प्रस्तुति ‘‘मोटे राम का निमंत्रण’’ का मंचन किया गया। प्रस्तुत नाटक मुंशी प्रेमचंद की प्रसिद्ध कथा ‘निमंत्रण’ पर आधारित है जिसका नाट्य रूपांतरण एवं निर्देशन रवीन्द्र रंगधर ने किया। संपूर्ण नाटक की कथावस्तु हास्य व्यंग पृष्ठभूमि पर आधारित रही। नाटक में मोटे राम शास्त्री निमंत्रण के लालच में सात ब्राह्मणों की जगह पर अपनी पत्नी व बच्चों को लेकर रानी साहिबा के दरबार में पहुंच जाते हैं। मगर उनका झूठ पकड़ में आ जाता है जब उनके मित्र चिंतामणि उनकी सारी पोल खोल देते हैं। यह नाटक एक सामाजिक सीख देता है कि व्यक्ति को कभी भी लालच और झूठ का सहारा नहीं लेना चाहिए।

समारोह के द्वितीय दिवस दिनांक 10 फरवरी, 2026 को संस्था क्रेज़ी ग्रीन समिति, सहारनपुर द्वारा श्री योगेश पवार द्वारा निर्देशित, सुप्रसिद्ध हास्य व्यंग लेखक के. पी. सक्सेना द्वारा लिखित नाटक ‘‘बाप रे बाप’’ का सफल मंचन, संत कबीर अकादमी प्रेक्षागृह, मगहर में मंचित किया गया। नाटक के माध्यम से यह दर्शाया गया कि माता पिता एवं घर के बुजुर्ग लोगों की देखभाल अति आवश्यक है।

तृतीय दिवस संत कबीर अकादमी, मगहर में आयोजित संभागीय नाट्य समारोह में दिनांक 11 फरवरी, 2026 को देवसु थिएटर आर्ट्स सोसाइटी लखनऊ की प्रस्तुति ‘दरोगा जी चोरी हो गई’’ का मंचन किया गया। नाटक के लेखक श्री जे पी सिंह जयवर्धन तथा मंच प्रस्तुति करण परिकल्पना श्री आनंद प्रकाश शर्मा, सहायक निर्देशक मोहित यादव, संपूर्ण परिकल्पना एवं निर्देशन श्री अशोक लाल का रहा। प्रस्तुत नाटक एक छोटी-सी चोरी की घटना की पर आधारित था।

चौथे एवं समापन दिवस पर उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी (संस्कृति विभाग) लखनऊ द्वारा संत कबीर अकादमी, मगहर के सहयोग से आयोजित द्वितीय संभागीय नाट्य समारोह के अन्तिम दिवस दिनांक 12 फरवरी, 2026 को संकल्प साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था बलिया द्वारा नाटक ‘‘कर्मयोगिनी अहिल्याबाई होल्कर’’ मंचन किया गया, जिसके लेखक व निर्देशक आशीष त्रिवेदी है। नाटक में अहिल्याबाई के जीवन संघर्ष, उनकी न्यायप्रियता, दूरदर्शिता एवं धार्मिक और सांस्कृतिक उत्थान के प्रति उनके समर्पण को दर्शाया गया।

नाटक में दिखाया गया कि एक साधारण परिवार की लड़की मालवा साम्राज्य की बहु बनती है। लेकिन जीवन में सुख नहीं पाती । अपने पति, ससुर और पुत्र के मृत्यु के बाद जब मालवा साम्राज्य की गद्दी संभालती है तो बहुत सारी कठिनाइयां आती है लेकिन अहिल्याबाई उन कठिनाइयों से जूझते हुए ना सिर्फ मालवा साम्राज्य को मजबूत किया बल्कि एक स्त्री का मुखर स्वर बन कर विरोधियों को चुनौती भी दिया।शांति, स्थिरता और प्रगति के राह पर चलते हुए शासन का संचालन करती हैं। कई क़िलें, सड़कें, कुँएं और विश्राम गृह बनवाने में योगदान दिया। शिव के इस उपासक ने मुगल काल में क्षतिग्रस्त काशी विश्वनाथ मंदिर का जीर्णाेद्धार करवाने के साथ ही औरंगाबाद के घृष्णेश्वर मंदिर के पुनर्निर्माण में अपना योगदान दिया। अपनी राजधानी महेश्वर के नाम पर कपड़ा उद्योग को बढ़ावा देते हुए माहेश्वरी साड़ियों को जन्म दिया।

उ.प्र. संगीत नाटक अकादमी, लखनऊ (संस्कृति विभाग, उ0प्र0) एवं छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के सहयोग से आयोजित संभागीय नाट्य समारोह 2025-26 के अन्तर्गत दिनांक 16 फरवरी, 2026 को नाट्य वास्तु सांस्कृतिक एवं सामाजिक संस्था, कानपुर द्वारा नाटक ‘‘तुम्हें कौन सा रंग पसन्द है’’ का मंचन किया गया जिसके लेखक पाली भूपिंदर सिंह तथा निर्देशक प्रवीन कुमार अरोड़ा हैं।

नाटक में डी.के. और अजनबी के माध्यम से नाटक विवाहेत्तर संबंधों (पोस्ट मैरिज रिलेशन) और लिव इन रिलेशन पर एक स्वस्थ बहस प्रस्तुत करता है, नाटक में दर्शाया गया कि बहुत सी प्राइवेट कंपनियां अपना स्वार्थ सिद्ध करने के लिए अनैतिक संबंधों का सहारा लेती हैं। हमारा समाज मजबूत पारिवारिक संबंधों पर टिका है, और यदि हम अनैतिक संबंधों की वकालत करेंगे तो यह हमारी सामाजिक परम्पराओं के लिए खतरा है ।
नाट्य प्रस्तुति में मुख्य पात्र डी.के. प्रवीन अरोड़ा द्वार अजनबी के रूप में कामेश सेठी ने उत्कृष्ट अभिनय किया, नौजवान की भूमिका कृष्णा चौधरी ने व वेटर की भूमिका कुलदीप मिश्रा ने निभाई तथा संगीत कृष्णा ने व प्रकाश संचालन आयुष यादव ने किया।

सम्भागीय नाट्य समारोह की द्वितीय संध्या दिनांक 16 से 19 फरवरी, 2026 तक आयोजित में द्वितीय दिवस दिनांक 17 फरवरी, 2026 को कौशाम्बी की संस्था ‘इण्डियन आर्ट एण्ड कल्चरल सोसाइटी’ ने नाटक ‘नशा’ का मंचन किया जिसका नाट्य रूपांतरण एवं निर्देशन तेजेन्द्र सिंह ‘तेजू’ ने किया है। यह नाटक दो युवकों, ईश्वरी और वीर की कहानी है, जो समाज के दो अलग-अलग वर्गों का प्रतिनिधित्व करते हैं। ईश्वरी एक रईस जमींदार का बेटा है, जबकि वीर एक गरीब क्लर्क का। वीर हमेशा जमींदारों की विलासिता और उनके अनैतिक व्यवहार की आलोचना करता है।

कहानी में रोमांचक मोड़ तब आता है जब छुट्टियों में वीर अपने दोस्त ईश्वरी के साथ उसके घर जाता है। वहां ईश्वरी उसे एक ‘गांधीवादी कुंवर साहब’ के रूप में पेश करता है। धीरे-धीरे वीर पर उस ठाठ-बाट और सम्मान का ऐसा ‘नशा’ चढ़ता है कि वह खुद उन बुराइयों का हिस्सा बन जाता है जिनकी वह कल तक निंदा करता था। नाटक यह संदेश देता है कि परिस्थितियां बदलते ही मनुष्य का व्यवहार और सिद्धांत कैसे बदल जाते हैं। इस अवसर पर स्वामी हरिदास नाट्य अकादमी के निर्देशक डॉ.राज कुमार त्रिपाठी, प्रशांत यादव कार्यक्रम समन्वयक संगीत नाट्य अकादमी, प्रो.मीतकमल समेत काफी संख्या में दर्शक मौजूद रहे ।

इसी क्रम में तृतीय दिवस दिनांक 18 फरवरी, 2026 को यायावर रंगमंडल, लखनऊ की संस्था द्वारा नाटक ‘‘हाय हैंडसम’’ का मंचन किया गया जिसके लेखक जयवर्धन तथा परिकल्पना एवं निर्देशन मो0 हफ़ीज़ द्वारा किया गया। प्रस्तुत नाटक के माध्यम से दर्शाया गया कि उम्र के अंतिम पड़ाव में जब जीवन-साथी बिछुड़ चुका हो और बेटे-बहू को पास बैठकर दो बात करने की भी फुर्सत न हो, तो मन पीड़ा से व्याकुल हो उठता है। इस समस्या को नाटक में संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत किया गया। नाटक दर्शकों को मनोरंजन के साथ यह संदेश भी देता है कि मनुष्य को युवावस्था से अधिक वृद्धावस्था में जीवन-साथी की आवश्यकता होती है। हमें उम्र से भले ही सेवानिवृत्त होना पड़े, पर जीवन से कभी सेवानिवृत्त नहीं होना चाहिए।

कार्यक्रम में चौथे एवं समापन दिवस पर दिनांक 19 फरवरी, 2026 को माध्यम सामाजिक सांस्कृतिक साहित्यिक संस्था प्रयागराज द्वारा नाटक ‘‘किराए का मकान’’ का मंचन किया गया। सतीश डे लिखित इस नाटक का निर्देशन डॉ. विनय श्रीवास्तव द्वारा किया गया। सतीश डे लिखित इस नाटक का निर्देशन डॉ. विनय श्रीवास्तव ने किया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि कुलपति की पत्नी व जानी मानी नृत्यांगना वंदना पाठक, अकादमी के आब्जर्वर व वरिष्ठ रंगकर्मी डा. ओमेन्द्र कुमार, डॉ. राजकुमार त्रिपाठी, वरिष्ठ रंगकर्मी राधेश्याम दीक्षित, रतन राठौर सहित अन्य अतिथि उपस्थित रहे।

नाटक में मकान मालिक के निधन के बाद उसके दो नौकर प्रीतम और बालम उसके एक ही कमरे को एक युवती तथा एक युवक दोनों को किराए पर दे देते हैं। युवक रात में नौकरी करता है और युवती दिन में। कुछ दिनों तक तो दोनों किरायेदारों का सामना नहीं होता, किंतु बीच-बीच में हास्यास्पद स्थितियां उत्पन्न होती रहती हैं और दोनों नौकरों प्रीतम व बालम की होशियारी उन्हें ही चक्कर में डालती रहती है। अंत में उनकी होशियारी का खुलासा होता है। कलाकारों में कौस्तुभ पांडेय (साजन), अनुज कुमार (प्रीतम), प्रत्यूष वार्ष्णेय (बालम), दिव्या शुक्ला (मंजूबाला), विपिन गौड़ (ताराचंद्र), अविनाश कुमार (धनीराम) और आदर्श दुबे (डाकिया) ने अपने बेहतरीन अभिनय से खूब हंसाया। संगीत संयोजन - रिभू श्रीवास्तव, प्रकाश संयोजन - विनय श्रीवास्तव, रूप सज्जा - दिव्या, वस्त्र विन्यास -अंशु श्रीवास्तव, मंच सामग्री - ओम श्रीवास्तव, मंच निर्माण - आर्यन नागर, प्रबंधन - हरि नारायण पांडेय, सुजीत चन्द्रा, प्रस्तुति सहायक - वंदना राठौर, कृष्णा यादव और प्रस्तुति - डॉ. अशोक कुमार शुक्ल की रही। नाटक के समापन के उपरान्त मुख्य अतिथि द्वारा कलाकारों को सम्मानित किया गया।
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