चौरी-चौरा शताब्दी महोत्सव

चौरी-चौरा शताब्दी महोत्सव

चौरी-चौरा शताब्दी महोत्सव (दिनांक 04 फरवरी, 2021 से 04 फरवरी, 2022) के अंतर्गत संस्कृति विभाग उ0प्र0 द्वारा आयोजित स्कृतिक कार्यक्रम में उ0प्र0संगीत नाटक अकादमी द्वारा उद्घाटन के अवसर पर दिनांक 04 फरवरी, 2021 को चौरी-चौरा गोरखपुर में 'चौरी-चौरा थीम सांग पर सांगीतिक कथक नृत्य' की प्रस्तुति की गयी, जिसको माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी ने सजीव और देश के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी एवं प्रदेश की माननीया राज्यपाल श्रीमती आनन्दी बेन पटेल जी ने ऑनलाइन देखा।

चौरी-चौरा शताब्दी महोत्सव

चौरी-चौरा शताब्दी महोत्सव के उपलक्ष्य में उ0प्र0 संगीत नाटक अकादमी, लखनऊ (संस्कृति विभाग उ0प्र0) द्वारा नटराज संगीत महाविद्यालय, बाँदा के सहयोग से श्री जयप्रकाश तिवारी के निर्देशन में दिनांक 05 मार्च, 2021 से 03 अप्रैल, 2021 तक तीस दिवसीय नाट्य प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन बाँदा में किया गया। इस कार्यशाला के मुख्य आयाम हैं - शारीरिक अभ्यास, स्वर एवं सम्भाषण, चिंतन, पर्यवेक्षण, विश्लेषण, कल्पनाशीलता, आलेख अध्ययन, चरित्र चित्रण आदि। प्रतियोगिता के अंत में देश भक्ति से प्रेरित नाट्य प्रस्तुति का मंचन भी किया गया।

चौरी-चौरा शताब्दी महोत्सव के उपलक्ष्य में उ0प्र0 संगीत नाटक अकादमी, लखनऊ (संस्कृति विभाग उ0प्र0) द्वारा 'लोकयात्री' सामाजिक संस्थान, प्रतापगढ़ के सहयोग से श्री राघवेन्द्र प्रताप सिंह के निर्देशन में दिनांक 01 से 30 मार्च, 2021 तक तीस दिवसीय नाट्य प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन प्रतापगढ़ में किया गया। इस कार्यशाला के मुख्य आयाम हैं- अभिनय के बेसिक पहलू, स्वर एवं सम्भाषण, बाॅडी लैंग्वेज, बाॅडी मूवमेंट आदि। प्रतियोगिता के अंत में देश भक्ति से प्रेरित नाट्य प्रस्तुति का मंचन भी किया गया।

शास्त्रीय संगीत प्रतियोगिता

अकादमी द्वारा विगत 46 वर्षों से प्रदेश में शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में उभरती नवोदित प्रतिभाओं को खोजकर उन्हे व्यवसायिक कला के क्षेत्र में पदार्पण करने हेतु प्रोत्साहित करना है। इस संगीत प्रतियोगिता का आयोजन दो चरणों में किया जाता है- प्रथम चरण में मंडल स्तर पर शास्त्रीय सम्भागीय शास्त्रीय संगीत प्रतियोगिता तथा द्वितीय चरण में प्रादेशिक संगीत प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है।

इसी क्रम में वर्ष 2020-21 में 19 मंडलों में सम्भागीय शास्त्रीय संगीत प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता के अंत में शास्त्रीय संगीत के प्रतिभागियों द्वारा चौरी-चौरा शताब्दी महोत्सव के अंतर्गत देश भक्ति पूर्ण रचनाओं का गायन भी किया गया। यह शास्त्रीय संगीत प्रतियोगिता निम्नलिखित मंडलों में सम्पन्न की गयी-
गोरखपुर, प्रयागराज, देवीपाटन, कुशीनगर, मऊ, वाराणसी, विन्ध्यांचल, अयोध्या, लखनऊ, बाँदा, अतर्रा, झाँसी, मेरठ, बरेली, मुरादाबाद, आगरा, हाथरस, सहारनपुर, कानपुर।

कथक पल्लव

दिनांक 30 जून, 2021 को उ0प्र0 संगीत नाटक अकादमी, के अन्तर्गत स्थापित कथक केन्द्र, लखनऊ द्वारा आयोजित कोविड-19 को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 01 जून से 30 जून तक एक माह की निःशुल्क कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में लगभग 650 बच्चों ने प्रतिभाग किया, अकादमी द्वारा आयोजित कार्यशालाएं 8 पालियों में विभाजित कर संचालित की गई। इन कार्यशालाओं का संचालन कथक केन्द्र के निदेशक श्री तरूण राज के निर्देशन में कथक केन्द्र की प्रशिक्षकाओं सुश्री श्रुति शर्मा एवं सुश्री नीता जोशी द्वारा किया गया। इस कार्यशाला में 8 वर्ष से 56 वर्ष तक के अभ्यर्थियों को कथक के आगामी हस्तक, टुकड़े, परमेलू, परन, नटवरी, कवित्त, तिहाईयों के अतिरिक्त भावपक्ष ठुमरी, गजल, भजन एवं सूफी इत्यादि भाव सीखने का अवसर प्राप्त हुआ।

कार्यशाला का समापन कार्यक्रम चौरी-चौरा शताब्दी वर्ष एवं आजादी के अमृत महोत्सव को यादगार बनाते हुये देशभक्ति कविताओं ‘‘स्व0 अटल बिहारी वाजपेई जी द्वारा रचित ‘‘कंठ-कंठ में एक राग है’’ एवं ‘‘माखन लाल चतुर्वेदी द्वारा रचित ‘पुष्प की अभिलाषा’ एवं चौरी-चौरा घटना पर आधारित गीतों को कथक नृत्य में पिरोकर देशभक्त वीरों को नमन अर्पित करते हुए कार्यक्रम का समापन किया गया।

'हिन्दुस्तानी संगीत में अहम है कंठ साधना संस्कार', चौरी-चौरा शताब्दी समारोह और आजादी का अमृत महोत्सव के तहत उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी की ओर से हिन्दुस्तानी संगीत में कंठ संस्कार विषयक वेबिनार का आयोजन हुआ। अकादमी द्वारा आयोजित इस वेबिनार में लखनऊ की सीमा भारद्वाजए दिल्ली के पं देवेंद्र शर्मा 'बृजरंग' वाराणसी के डॉ राम शंकर और झांसी के समीर भालेराव ने अपने विचार रखे। संगीतज्ञों ने शास्त्रीय गायकी में ढली बंदिशे सुनाकर कंठ संस्कार के कई उदाहरण दिये।

अकादमी सचिव तरुण राज ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि हिन्दुस्तानी संगीत में कंठ संस्कार विषय काफी विस्तारित है। शब्द और अक्षरों की साधना करना उन्हें सुरों के जरिये लोगों तक पहुंचना कठिन कार्य है।

स्वतंत्रता आंदोलन-नाट्य लेखन

उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के द्वारा दिनांक 16 जुलाई, 2021 को आजादी का अमृत महोत्सव के अंतर्गत "स्वतंत्रता आंदोलन-नाट्य लेखन" विषयक वेबिनार एवं अभिलेखागार रिकॉर्डिंग का आयोजन किया गया जिसमें लखनऊ से श्री सुशील कुमार सिंह, गाज़ियाबाद से श्री राजेश कुमार, मंबई से श्री विजय पण्डित, एवं दिल्ली से श्री संगम पाण्डे, ने अपने-अपने विचार रखे। वेबिनार में विद्वान लेखकों का स्वागत करते हुए अकादमी के सचिव श्री तरुण राज ने कहा कि आज का विषय कई दृष्टियों से अहम है। आजादी के लिए किसानए नेताए मजदूर, कलाकार, साहित्यकार सब अपने-अपने तरह से संघर्ष कर रहे थे। उन्होंने कहा कि नाटक के क्षेत्र में निर्देशक समाज तक विचारों को पंहुचाने का कार्य करता है। अंत में वेबिनार को संचालन कर रही अकादमी की नाट्य सर्वेक्षक श्रीमती शैलजा कांत ने सभी वक्ताओं और वेबिनार में शामिल दर्शकों-श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।

वीर शहीदों को नमन

संस्कृति विभाग उ0प्र0 द्वारा ‘‘आज़ादी का अमृत महोत्सव’’ एवं ‘‘चौरी-चौरा शताब्दी महोत्सव’’ आयोजन की श्रृंखला के अन्तर्गत दिनांक 09 अगस्त, 2021 को ‘काकोरी एक्शन’ थीम की वर्षगांठ पर बाजनगर, काकोरी में आयोजित कार्यक्रम में उ0प्र0 संगीत नाटक अकादमी द्वारा ‘काकोरी ट्रेन एक्शन थीम’ पर कथक केन्द्र की छात्राओं द्वारा ‘‘क्रांतिकारियों तुम्हें नमन’’ नृत्य नाटिका प्रस्तुत की। इस प्रस्तुति को  मा0 राज्यपाल महोदया सुश्री आनन्दीबेन पटेल द्वारा सराहा गया तथा उपस्थित जन समूह द्वारा भी प्रशंसा की गई। इस अवसर पर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री महोदय भी उपस्थित रहे।

इस कार्यक्रम को देखने के लिए निम्न लिंक पर क्लिक करें:
https://youtu.be/n9PXHSn8fmg

शहीदों ने लौ जगाई जो

उ0प्र0 संगीत नाटक अकादमी, कथक केन्द्र लखनऊ द्वारा कोविड-19 की गाइडलाइन को ध्यान में रखते हुए दिनांक 14 अगस्त, 2021 को ‘‘आज़ादी का अमृत महोत्सव एवं चौरी-चौरा शताब्दी महोत्सव’’ के अन्तर्गत स्वतंत्रता दिवस की 75वीं वर्षगाँठ के अवसर पर देश की आज़ादी के लिए शहीद वीरों को समर्पित कथक नृत्य-नाटिका ‘‘शहीदों ने लौ जगाई जो’’ में कवि श्री सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘‘निराला’’, स्व0 उर्मिल कुमार थपलियाल एवं ‘‘श्री राम प्रसाद बिस्मिल’’ द्वारा रचित काव्यों का समावेश कथक नृत्य में पिरोकर किया गया, गोण्डा के आल्हा गायक सहीराम पांडेय और उनके साथियों ने अपने जोशीले स्वरों से स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का पुण्य स्मरण किया।

आज़ादी का अमृत महोत्सव

उ0प्र0 संगीत नाटक अकादमी, कथक केन्द्र लखनऊ द्वारा, दिनांक 16 अगस्त, 2021 को ‘‘आज़ादी का अमृत महोत्सव’’ एवं ‘‘चौरी-चौरा शताब्दी महोत्सव’’ आयोजन की श्रृंखला के अन्तर्गत भारत के स्वतंत्रता संग्राम में जहां वीर-वीरांगनाओं ने अपने प्राणों को न्यौछावर कर देश को आजादी दिलाने का महान कार्य किया वहीं कई लेखकों ने अपनी कलम से आज़ादी के आन्दोलन को एक नई शक्ति प्रदान की। इसी क्रम में सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी, माखनलाल चतुर्वेदी, सुमित्रानन्दन पंत आदि के साथ-साथ डॉ0 सुभद्रा कुमारी चौहान जी का नाम भी मुख्य है। सुभद्रा कुमारी चौहान जी ने झांसी की रानी के सम्पूर्ण जीवन कृत्य पर आधारित कविता ‘झांसी की रानी’ लिखकर, भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में झांसी की रानी के योगदान का बहुत ही खूबसूरत चित्रण किया है। इन्हीं की कविताओं पर आधारित कथक नृत्य नाटिका ‘‘मणिकर्णिका’’ की प्रस्तुति डॉ0 सुरभि शुक्ला के निर्देशन में उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र प्रेक्षागृह, प्रयागराज में की गई। इस नाटिका के अंत में आधुनिक भारत के लिए एक संदेश भी दिया गया है।

उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी द्वारा दिनांक 01 अक्टूबर, 2021 को चौरी-चौरा शताब्दी एवं आजा़दी का अमृत महोत्सव के अंतर्गत राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के जन्म दिवस के अवसर पर श्री रामचन्द्र जी के भजनों पर आधारित गायन कार्यक्रम किया गया।

महात्मा गांधी को पुष्पांजलि अर्पित करते हुए कार्यक्रम का आरम्भ हुआ, अतिथियों का स्वागत करते हुए अकादमी सचिव, श्री तरुण राज ने अहिंसा के पुजारी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। महात्मा गांधी के सत्य के प्रयोगों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जिन सिद्धांतों को गांधीजी ने दूसरों को बताया, उन्हें पहले खुद के आचरण में उतारा।

कार्यक्रम की शुरुआत लखनऊ की गायिका विभा सिंह ने गोस्वामी तुलसीदास की भजन रचना- जाके प्रिय न राम वैदेही से समर्पण भरे स्वरों में की। मानस रचयिता गोस्वामी जी की राग शिवरंजनी में निबद्ध और खुद की स्वरबद्ध एक और भजन रचना- वन चले राम रघुराई को प्रस्तुत करते हुए श्रोताओं में करुणा का संचार किया। केशरीनाथ त्रिपाठी की रचना- मैंने भजा है जय श्री राम.... को राग जोग में बांधकर की।

कार्यक्रम के दूसरे कलाकार के तौर पर कथा, प्रवचन व सुगम गायन में सिद्धहस्त और गुरु निम्बकाचार्य से दीक्षित मथुरा के सर्वेश्वर शरण भक्ति सरिता का आरम्भ राग भैरवी में बंधी नाम धुन- राजाराम राम राम सीता राम राम राम......से मधुर स्वरों में की। सधे गायक सर्वेश्वर ने गायन के बीच-बीच में श्रीराम प्रसंगों की चर्चा करते हुए- राम नाम अति मीठा है कोई गाके देख ले....,  वैष्णव जन....., राम नाम के साबुन से जो मनका मैल छुड़ाएगा और रघुपति राघव राजा राम जैसे लोकप्रिय कई भजन और सुनाए।